पीरियड्स(periods) क्या हैं,लड़कियों को पीरियड क्यों होते हैं – और पीरियड्स में कैसे रखे अपना ध्यान

पीरियड्स क्या होते हैं | लड़कियों को पीरियड क्यों होते हैं | मेंस क्या होते हैं | मासिक धर्म
पीरियड्स क्या होते हैं | लड़कियों को पीरियड क्यों होते हैं | मेंस क्या होते हैं | मासिक धर्म

मासिक धर्म चक्र क्या है ?

जैसा की हम जानते है हर महिला अपने मासिक के पहले दिन से चौदहवे दिन पर उसके अंडकोष से अंडाशय अलग होता है। जब वह अंडकोष गर्भ नली में आता है और वीर्य से अलग हुए शुक्राणु के साथ मिलन करता है तभी तभी भ्रूण का निर्माण होता है। जब उसका मिलन किसी शुक्राणु के साथ नहीं होता तब वह अंडकोष गर्भ नली से होकर गर्भास्य की दिवार तक पहुँचता है। जैसा की गरुण का कोई निर्माण नहीं हुआ है तो जो दिवार गर्भास्य के, भ्रूण को अपनाने के लिए होती है, Estrogen & Progestrone जैसे अन्तर्स्राव के इफ़ेक्ट में, वह गर्भास्य की दिवार अपने आप अलग होकर मासिक के रूप में बहार आती है। इसे मासिक धर्म चक्र कहा जाता है।

बच्चो के इसके बारें कैसे बताया जाये ?

अक्सर हमने सुना है लोगो को कहते हुए की शरीर की गन्दगी जो निकलती है वह है, यहीं से हमारी गलत शुरुआत होती है। यह कोई शरीर की गन्दगी नहीं एक नार्मल पक्रिया है। इसका किसी भी स्त्री के जीवन में बहुत महत्व है बच्चो तक यह जानकारी हम इसी हिसाब से पहुंचा सकते है की जो गर्भास्य की दिवार उनकी बनी है वह अभी फलित नही हो पायी है जिसकी वजह से गर्भास्य के मुख(Yoni Marg) से होकर यह खून के स्त्राव में बाहर निकलता है। इसमें किसी को भी ओछा या फिर कम फील करने कोई जरुरत नहीं है। इन 3 दिनों में (3 से 5 दिन ) जब आप को रक्तस्राव होता है उसमे कॉन्फिडेंस, ऐटिटूड होना चाहिए और साफ़ सफाई का खाश ध्यान रखना चाहिए।

रक्तस्राव शुरू होने पर हमें क्यों साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए ?

मासिक चक्र के दरमियान (रक्तस्राव के दरमियान) योनिमार्ग के PH में थोड़ा डाल बदल होता है और वह एसिडिक से थोड़ा एल्कलाइन हो जाता है जिसके वजह से अंदर रोग लगने वाले जीवाणुओं की मात्रा बढ़ जाती है उसको प्रिवेंट करने के लिए मार्किट में बहुत सारे Hygeine Wash उपलब्ध है। Hygein Wash जब भी इस्तेमाल करें तब हमेशा यह ध्यान रखें की वह बाहर की तरफ साफ़ करने के लिए है , योनिमार्ग के अंदर पानी या जेट से स्प्रे से नहीं साफ़ करें। थोड़ा Hygein Wash लेकर सुबह शाम या फिर जब आप को समय मिले तब उससे बाहर की स्किन साफ़ करें योनिमार्ग में पानी डालना या जेट स्प्रे डालने से उसके Ph को मदद करने वाले जीवाणुओं को काम कर देता देता है जिसके वजह से भी इन्फेक्शन लगने के चांसेस बढ़ जाते है।

रक्तस्राव कंटिन्यू शुरू की वजह से निचे कुछ गिला-पन रहता है, यह गीलापन अगर ज्यादा समय तक रहता है और इसमें खून से भरा हुआ जैसे – पैड हो, सैनेटरी नैपकिन हो या कोई कपडा हो, उसके अंदर खून रहने की वजह से उसमे शुक्राणु बढ़ना शुरू हो जाते है और उसका चेप लगना शुरू हो जाता है।

जब रक्तस्राव शुरू होता है तब गर्भास्य का मुख भी खुला होता है और रक्तवाहिनी भी खुली होती है जिसके वजह से इन्फेक्शन योनिमार्ग से उप्पर चढ़ने का खतरा हमेशा बना होता है।

क्या ध्यान रखना चाहिए ?

  • रोज नहाना चाहिए।
  • निचे की जगह साफ़ कैसे रखना चाहिए? – बच्चो को और बड़ों को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए की निचे का जो प्राइवेट पार्ट है वह हमेशा आगे से पीछे की तरफ साफ़ करना चाहिए, अगर हम पीछे से आगे की तरफ साफ़ करते है तब मल द्वार से जो भी जीवाणु या कीटाणु होते है वह आगे की और आते है और उसकी वजह से योनिद्वार में या पेशाब नली में चेप होने की शत्रुता बढ़ जाती है। निचे की जगह साफ़ कैसे रखना चाहिए? – बच्चो को और बड़ों को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए की निचे का जो प्राइवेट पार्ट है वह हमेशा आगे से पीछे की तरफ साफ़ करना चाहिए ,अगर हम पीछे से आगे की तरफ साफ़ करते है तब मल द्वार से जो भी जीवाणु या कीटाणु होते है वह आगे की और आते है और उसकी वजह से योनिद्वार में या पेशाब नली में चेप होने की शत्रुता बढ़ जाती है।
  • हमें कोन सी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए – आप रक्तस्राव के दरमियान हम मार्किट और घर की बनाई चीजों का इस्तेमाल कर सकते है जैसे – पैड, नैपकिन, घर का कोई साफ़ कपडा।
  • अगर घर की बनाई हुई चीजें इस्तेमाल करने में कंफर्ट महसूस होता है तो एक चीज का अवस्य ध्यान रखें जो reusable पैड्स है या घर के बनाये हुए नैप्किन्स है जो आप बार-बार इस्तेमाल करते है – सबसे पहले उनको धोकर धुप में सुखना चाहिए इससे जीवाणु अपने आप मर जाते है। और जिस भी चीज को आप इस्तेमाल करते है उसको हो सके तो एक ही बार इस्तेमाल करने की आदत बनाइये और अगर इस्तेमाल और अगर दुबारा इस्तेमाल करने की जरुरत पड़ती है तो उसको धुप में जरूर सुखाएं।
  • सैनेटरी नैप्किन्स अगर आप इस्तेमाल करते है तो उसको 6 से 8 घंटे जरूर बदलें चाहे वह बिगड़ा हो या न हो।
  • अगर आप पेम्पेरस इस्तेमाल करते है, अगर वह अंदर रह जाये और ज्यादा सुख जाये या फिर उसको निकलना भूल जाये तो एक Toxic shock syndrome नाम की तकलीफ होती है जो कोई भी डॉक्टर नहीं चाहेगा आप को वह हो क्युकी वह बहुत ही जानलेवा तकलीफ है उससे चेप पुरे पुरे शरीर में फैलता है और ह्रदय की तकलीफ होना शुरू हो जाती है तो जब भी यह इस्तेमाल करे तो ध्यान रखें की वह बिगड़ी हो या न हो उसको 6 से 8 घंटे में बाहर निकल दें।

डिस्पोज़ कैसे करें ?

  • घर के बनाये कपडे अगर आप फिर से इस्तेमाल करते है तो उसको धुप में जरूर सुखायें।
  • सैनेटरी पैड या पैम्पर्स अगर डस्टबिन में डालते है तो उसको पेपर से अच्छे से लपेट कर डालें ताकि किसी और को न हो।
  • अगर आप कहीं बाहर है तो उसको खुली जगह में न फेंके।

मासिक के दरमियान होने वाली कुछ तकलीफें।

कमर का दर्द होना, निचे पेड़ू में दर्द होना, मूड का सही नहीं रहना या बहुत ज्यादा खून निकलना। यह पीरियड्स में आने वाली आम बात है। लोगो की कई धारणाये होती है की मासिक धर्म के दौरान अगर पैड ज्यादा इस्तेमाल करते है इसका मतलब यह है की आपको ज्यादा खून निकलता है तो यह गलत है। मासिक धर्म के दौरान अगर आप को 30ml से 80ml के बिच में खून गिरता है या आसान भासा में एक दिन में 1 से 2 पैड ख़राब होता है तो यह नार्मल है इसको अधिक या कम मासिक नहीं कहा जाता है। कमर का दर्द होना या पेडू का दर्द होना – मासिक के दरमियान गर्भास्य थोड़ा अपने आप संकोचित होता है जिसकी वजह से आजु बाजू के स्नायु में थोड़ा सा तनाव और थकान महसूस होता है जिसकी वजह से दर्द होता है। इसके लिए आप कोई भी दर्द मिटने वाली दवाई ले सकते है। अगर अति सयुक्ति में दर्द होता है या आप के दिन प्रतिदिन की प्रक्रिया में अड़चन आती है तो डॉक्टर का परामर्श लेना अति आवश्यक बन है।